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सदियों पुरानी, फिर भी सबसे आगे: भारत की वो कंपनियां जो 100+ साल बाद भी हजारों करोड़ कमा रही हैं

सदियों पुरानी, फिर भी सबसे आगे: भारत की वो कंपनियां जो 100+ साल बाद भी हजारों करोड़ कमा रही हैं

कुछ चीजें वक्त के साथ और मजबूत होती हैं — और भारत की कुछ कंपनियां इसकी जीती-जागती मिसाल हैं।

जब दुनिया स्टार्टअप्स और यूनिकॉर्न्स की बात करती है, तब भारतीय शेयर बाजार में कुछ ऐसे दिग्गज चुपचाप हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमाते रहते हैं — जिनकी नींव तब रखी गई थी जब भारत अभी भी औपनिवेशिक जंजीरों में जकड़ा हुआ था। ये कंपनियां सिर्फ survive नहीं कर रहीं, बल्कि thrive कर रही हैं। और यही बात इन्हें असाधारण बनाती है।

इस पूरी कहानी की शुरुआत होती है वाडिया ग्रुप से, जिसकी जड़ें सन् 1736 तक जाती हैं — यानी अमेरिका के आज़ाद होने से भी पहले। इसी ग्रुप की बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (BBTC), जो 1863 में स्थापित हुई, भारत की सबसे पुरानी publicly traded कंपनी है। चाय, कॉफी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में काम करने वाली इस कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में करीब ₹1,240 करोड़ की नेट इनकम दर्ज की। इसी ग्रुप की बॉम्बे डाइंग, जो 1879 में शुरू हुई थी, आज भी टेक्सटाइल और रियल एस्टेट में सक्रिय है — एक ऐसी विरासत जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी खुद को reinvent करती रही है।

इससे भी पुरानी है मुरुगप्पा ग्रुप की EID पैरी, जिसकी स्थापना 1788 में हुई थी। चीनी, बायो-प्रोडक्ट्स और न्यूट्रास्युटिकल्स जैसे diverse सेक्टर्स में अपनी पकड़ बनाए रखते हुए इस कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में ₹878 करोड़ का consolidated net profit दर्ज किया। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं — यह दो सदियों से ज्यादा की business acumen का प्रमाण है। फिर आता है गोदरेज ग्रुप, जिसने 1897 में ताले बनाने से अपना सफर शुरू किया था और आज FMCG, रियल एस्टेट और appliances जैसे क्षेत्रों में एक household name बन चुका है। यह वो ब्रांड है जो हर भारतीय घर में किसी न किसी रूप में मौजूद है।

20वीं सदी की शुरुआत में जन्मी ITC लिमिटेड, जो 1910 में अस्तित्व में आई, आज सिगरेट, फूड, होटल, पेपर और agri-business जैसे कई क्षेत्रों में काम करती है और इसका हालिया net profit ₹20,000 करोड़ से भी ज्यादा रहा है — एक ऐसा आंकड़ा जो किसी भी नए-नवेले startup को सोचने पर मजबूर कर दे। और कैसे भूलें टाटा ग्रुप को — जो स्टील से लेकर ऑटोमोटिव तक, और TCS जैसी IT दिग्गज कंपनी के जरिए global tech landscape तक, हर मोर्चे पर भारत का परचम लहराता है। टाटा सिर्फ एक कंपनी नहीं, एक राष्ट्रीय संस्था है।

और इस पूरी फेहरिस्त में सबसे ऊंचा कद है स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का, जिसकी जड़ें 1806 तक जाती हैं। आज यह देश की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली बैंक है — एक public sector institution जो निजी बैंकों को भी पीछे छोड़ती है। यह भारतीय राज्य की आर्थिक रीढ़ है, और उसकी ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक भी।

इन कंपनियों की असली कहानी सिर्फ मुनाफे की नहीं है। यह कहानी है भारतीय उद्यमशीलता की उस अदम्य भावना की, जो औपनिवेशिक दमन में भी पनपी, आज़ादी के बाद की उथल-पुथल में भी टिकी रही, और globalization की आंधी में भी न सिर्फ बची बल्कि और विस्तृत हुई। जब GenZ भारत नए unicorns के सपने देखता है — और देखना भी चाहिए — तो इन सदियों पुरानी कंपनियों से एक सबक जरूर लेना चाहिए: असली legacy वो नहीं जो एक रात में बनती है, बल्कि वो है जो हर दौर में खुद को नए सिरे से साबित करती है। यही है भारत की असली आर्थिक ताकत।

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