पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की Joint Awami Action Committee (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने 4 जुलाई 2026 को एक वीडियो जारी करके भारत की जनता — खासतौर से पुंछ, राजौरी, मेंढर, जम्मू, श्रीनगर और लद्दाख-कारगिल के लोगों — से 5 जुलाई के विरोध प्रदर्शन में साथ देने की अपील की। यह पहली बार है जब PoK के किसी प्रमुख नेता ने सार्वजनिक रूप से भारत से समर्थन मांगा हो — और इस एक कदम ने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के GHQ तक हलचल मचा दी है।
सरदार अमन खान ने अपने वीडियो संदेश में कहा, “हमारे राशन के रास्ते बंद हैं, बुनियादी जरूरतों के रास्ते बंद हैं। यहां की फौज इस तैश में है कि अवाम सांस क्यों ले रही है।” उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक महीने से PoK में खून-खराबा जारी है और फौजगर्दी की हद हो चुकी है। पाकिस्तान सरकार ने इसी बीच सरदार अमन खान को आतंकवादी घोषित कर दिया — एक ऐसा कदम जिसे विश्लेषक पाकिस्तान की बौखलाहट का सबूत मान रहे हैं।
JAAC ने 5 जुलाई को पाकिस्तान की ज्यादतियों के खिलाफ पूर्ण चक्का जाम का एलान किया था। इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने PoK में मिलिट्री लॉकडाउन लागू कर दिया, कर्फ्यू लगाया और सामूहिक गिरफ्तारियां शुरू कर दीं। अवाम को दबाने के लिए आटे, बिजली और बुनियादी दवाओं की सप्लाई तक रोक दी गई — यानी पाकिस्तानी फौज ने निहत्थी जनता के खिलाफ एक पूरी economic warfare छेड़ दी है।
भारत से मदद की यह अपील पाकिस्तान के दशकों पुराने ‘कश्मीर प्रोपेगैंडा’ की कूटनीतिक कब्र खोद रही है। जो देश दुनिया के सामने “कश्मीर मुद्दे” का राग अलापता था, उसी के नियंत्रण वाले हिस्से से आज “हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं हैं” के नारे गूंज रहे हैं। इससे भी बड़ी बात — PoK की मुस्लिम अवाम का भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था से मदद मांगना पाकिस्तान की Two-Nation Theory को उसी की जमीन पर ध्वस्त करता है।
पाकिस्तानी जनरलों के जेहन में अब 1971 का भूत मंडरा रहा है। तब पूर्वी पाकिस्तान की अवाम ने भारत से मदद मांगी थी, भारत ने हस्तक्षेप किया और बांग्लादेश का जन्म हुआ — पाकिस्तान का नक्शा हमेशा के लिए बदल गया। इतिहास गवाह है कि जब जनता का सब्र टूटता है, तो देशों की सीमाएं बदल जाती हैं, और PoK में उठ रहा यह महाआंदोलन उसी दिशा में इशारा कर रहा है।
वर्ष 1971 में पाकिस्तान ने अपना एक हिस्सा खोया था। आज PoK की सड़कों पर उठती आवाजें और भारत से लगाई गई गुहार यह संकेत दे रही है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी की क्रूरता एक बार फिर पाकिस्तान के नक्शे को बदलने की दहलीज पर ला खड़ी हुई है। Bharat को इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखनी होगी — यह सिर्फ PoK का मामला नहीं, यह पूरे उपमहाद्वीप के भविष्य का सवाल है।

