आज से ठीक 48 साल पहले, 5 जुलाई 1977 को जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को सत्ता से बेदखल कर दिया था। उस एक रात ने पाकिस्तान की तकदीर हमेशा के लिए बदल दी — और आज भी वो मुल्क उसी जहर को काट रहा है। यह सिर्फ एक तख्तापलट की कहानी नहीं है; यह उस देश के डीएनए में घुसी फौजी मानसिकता की कहानी है, जो भारत का पड़ोसी होने का दावा करता है।
1977 से आज तक पाकिस्तान में कोई भी निर्वाचित सरकार अपना पूरा कार्यकाल शांति से पूरा नहीं कर पाई। फौज का साया हर चुनाव पर, हर प्रधानमंत्री पर, हर नीति पर पड़ता रहा है। इमरान खान हों या नवाज शरीफ — सबकी कहानी उसी 5 जुलाई के बोए जहर की अगली कड़ी है। भारत के लिए यह समझना जरूरी है कि हमारे पड़ोस में लोकतंत्र नहीं, वर्दी राज करती है — और यही पाकिस्तान की असली कमजोरी है।

