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चीन की नई चाल: बांग्लादेश-म्यांमार कॉरिडोर से भारत की पूर्वी सीमा पर मंडराता खतरा

चीन की नई चाल: बांग्लादेश-म्यांमार कॉरिडोर से भारत की पूर्वी सीमा पर मंडराता खतरा

बात शुरू होती है 1999 से, जब पहली बार बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार (BCIM) आर्थिक कॉरिडोर का विचार सामने आया था — एक महत्वाकांक्षी सपना, जो चारों देशों को सड़क, रेल, जलमार्ग और हवाई संपर्क से जोड़ता। लेकिन तब यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी, और दशकों तक फाइलों में दबी रही।

अब, पच्चीस साल बाद, बीजिंग ने उसी पुराने सपने को नए रूप में जिंदा कर दिया है — और इस बार इरादा कहीं ज्यादा ठोस और रणनीतिक दिखता है। ढाका में तैनात चीनी राजदूत याओ वेन ने हाल ही में स्पष्ट किया कि यह विचार बिल्कुल नया नहीं, बल्कि पुरानी नींव पर खड़ी एक नई इमारत है। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश इस पहल का हिस्सा बनना चाहें, चीन उनका स्वागत करेगा — एक कूटनीतिक निमंत्रण, जो असल में एक रणनीतिक दबाव है।

Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हालिया चीन यात्रा के दौरान इस प्रोजेक्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रस्ताव यह है कि चीन के कुनमिंग शहर को म्यांमार के रास्ते बांग्लादेश के प्रमुख बंदरगाहों — खासकर मोंगला पोर्ट — से जोड़ा जाए, जिससे चीन को बंगाल की खाड़ी तक सीधी पहुंच मिल सके।

यह पूरी योजना उसी CPEC मॉडल की तर्ज पर है, जिसके जरिये चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से अरब सागर तक अपनी पहुंच बनाई। पश्चिम में CPEC, और अब पूर्व में यह नया कॉरिडोर — भारत की दोनों तरफ चीन की रणनीतिक घेराबंदी का खाका साफ नजर आता है। यह महज संयोग नहीं, यह String of Pearls नीति का अगला अध्याय है।

रक्षा विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि शांतिकाल में व्यापार के लिए बनाया गया कोई भी सड़क, रेल और बंदरगाह नेटवर्क संकट या युद्ध की स्थिति में सैन्य रसद, सैनिकों और भारी उपकरणों की तेज आवाजाही के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो — एक बार यह कॉरिडोर बन जाए, तो चीन सड़क के रास्ते अपने टैंक और सैनिक भारत की पूरी पूर्वी सीमा तक पहुंचा सकता है। यही बात नई दिल्ली के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है।

स्थिति और भी जटिल तब हो गई जब 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट हुआ। हसीना के जाते ही ढाका और बीजिंग के रिश्ते तेजी से गहरे होने लगे। उसके बाद से एक के बाद एक ऐसे समझौते हुए, जिन पर भारत की पैनी नजर है:

इसके साथ ही, चीनी राजदूत ने खुलासा किया कि बीजिंग और ढाका के बीच केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि विदेश नीति और रक्षा मामलों पर ‘2+2 संवाद तंत्र’ शुरू करने पर भी सहमति बनी है — ठीक वैसा ही ढांचा, जैसा भारत और अमेरिका के बीच है। यह एक स्पष्ट संकेत है कि बांग्लादेश अब चीन के रणनीतिक दायरे में तेजी से समा रहा है।

भारत के सामने चुनौती सिर्फ एक कॉरिडोर की नहीं है। चुनौती यह है कि उसके पड़ोस में, उसकी आंखों के सामने, एक पूरा भू-राजनीतिक परिदृश्य बदल रहा है। पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में चीन, और अब पूर्व में बांग्लादेश — भारत की घेराबंदी की यह कोशिश नई दिल्ली को हर मोर्चे पर सतर्क और सक्रिय रहने पर मजबूर करती है। जवाब देने का वक्त अभी है।

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