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मस्जिदों-दरगाहों पर बुलडोज़र, फिर भी अखिलेश चुप क्यों? कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का सपा चीफ पर बड़ा हमला

मस्जिदों-दरगाहों पर बुलडोज़र, फिर भी अखिलेश चुप क्यों? कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का सपा चीफ पर बड़ा हमला

मस्जिदों-दरगाहों पर बुलडोज़र, फिर भी अखिलेश चुप क्यों? कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का सपा चीफ पर बड़ा हमला

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि उत्तर प्रदेश में मस्जिदों, दरगाहों और मदरसों पर बुलडोज़र चलने के बावजूद अखिलेश यादव आखिर खामोश क्यों हैं।

अखिलेश को सीधी चुनौती — “कमज़ोर हो तो अकेले लड़ो चुनाव”

मसूद ने सपा चीफ को सीधे ललकारते हुए कहा कि अगर वो इतने कमज़ोर हैं कि बोल भी नहीं सकते, तो 2026 के यूपी विधानसभा चुनाव में गठबंधन का सहारा लेने की बजाय अकेले मैदान में उतरें।

उन्होंने आरोप लगाया कि बुलडोज़र की कार्रवाई अब सिर्फ मुस्लिम धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं रही — मंदिर भी निशाने पर आ गए हैं। मसूद ने शंकराचार्य के उस बयान का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि वाराणसी में 150 मंदिर तोड़े गए।

सनातन धर्म के रक्षक होने का दावा — सवाल उठे

कांग्रेस सांसद ने सरकार के “सनातन धर्म के रक्षक” होने के दावे पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि जब खुद मंदिर टूट रहे हैं, तो यह दावा कितना खोखला है।

मसूद ने देश में बन रहे माहौल को “अजीब और परेशान करने वाला” बताया, जहाँ नागरिकों को बार-बार अपनी पहचान — वोटर, निवासी और धर्म तक — साबित करने पर मजबूर किया जा रहा है।

BJP पर आरोप — असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की साज़िश

मसूद ने BJP पर आरोप लगाया कि वो रोज़गार, शिक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे असली मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए जाति और धर्म के नाम पर नफरत फैला रही है।

उन्होंने कहा कि जब धार्मिक नेताओं से भी पहचान साबित करने को कहा जा रहा है, तो यह देश के लोकतांत्रिक ढाँचे पर सीधा हमला है।

कांग्रेस-सपा में दरार — 2026 से पहले गठबंधन पर संकट?

मसूद के इस बयान से कांग्रेस और सपा के बीच तनाव साफ दिखने लगा है। सहारनपुर के सपा नेताओं ने अखिलेश यादव के सामने यह मामला उठाया और कहा कि मसूद के बयान राजनीतिक माहौल बिगाड़ रहे हैं।

सपा नेताओं ने माँग की कि कांग्रेस नेतृत्व अपने सांसद को लगाम लगाए। 2026 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले यह आंतरिक खींचतान विपक्षी एकता के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।

कौन हैं इमरान मसूद?

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