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अमेरिका-ईरान MoU पर ट्रंप के साइन: वर्साय में मैक्रों के साथ डिनर पर हुई डील, जानें 14 अहम बिंदु

अमेरिका-ईरान MoU पर ट्रंप के साइन: वर्साय में मैक्रों के साथ डिनर पर हुई डील, जानें 14 अहम बिंदु

ट्रंप ने वर्साय में किए ईरान के साथ MoU पर हस्ताक्षर, मैक्रों थे साथ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस के वर्साय महल में ईरान के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह साइनिंग G7 शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ डिनर के दौरान हुई — वही मैक्रों, जो PM नरेंद्र मोदी के करीबी दोस्त और भारत के strategic partner हैं।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और ट्रंप दोनों ने इस MoU पर हस्ताक्षर किए। करीब चार महीने से जारी अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव को खत्म करने की दिशा में यह सबसे बड़ा कदम है।

मैक्रों — मोदी के यार, ट्रंप के गवाह

जब ट्रंप ने डील साइन की, तो उनके बगल में थे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों — भारत के उस दोस्त, जिन्होंने भारत को राफेल फाइटर जेट दिए और PM मोदी के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाया। भारत-फ्रांस की यह दोस्ती सिर्फ diplomatic नहीं, बल्कि defence और technology में भी गहरी है।

ट्रंप ने वर्साय से निकलते वक्त पत्रकारों को चिल्लाकर बताया — “It’s signed!” यानी डील हो गई।

ईरान और व्हाइट हाउस ने की पुष्टि

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने IRNA को बताया, “इस्लामाबाद MoU के टेक्स्ट को राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप दिया गया है। अब समझौते के कार्यान्वयन को परखने का वक्त है।”

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने Reuters को बताया कि इससे पहले रविवार को अमेरिकी VP जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने डिजिटल रूप से इस MoU पर दस्तखत किए थे, जिसके ट्रंप गवाह बने थे।

डील में क्या है? — 14 अहम बिंदु

होर्मुज खुलने से भारत को राहत

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है — वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद रहने से भारत समेत पूरी दुनिया में ऊर्जा कीमतें आसमान छू रही थीं

इस डील के बाद तेल बाजार में राहत की उम्मीद है, जो भारत की बढ़ती economy के लिए सीधे तौर पर फायदेमंद होगी। India’s energy security अब थोड़ी ज्यादा मजबूत नजर आती है।

आगे क्या?

पहले खबर थी कि 19 जून को जेनेवा में फाइनल डील साइन होगी। लेकिन ट्रंप के वर्साय में हस्ताक्षर के बाद यही MoU अब फाइनल डील मानी जा रही है। अब नजरें टिकी हैं इसके implementation पर — खासकर Strait of Hormuz को खोलने और frozen assets की रिलीज पर।

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