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होर्मुज संकट के बाद सरकार का बड़ा एक्शन: डीजल निर्यात पर ₹14 और ATF पर ₹12.5 प्रति लीटर ड्यूटी बढ़ी — जानें आप पर क्या पड़ेगा असर

होर्मुज संकट के बाद सरकार का बड़ा एक्शन: डीजल निर्यात पर ₹14 और ATF पर ₹12.5 प्रति लीटर ड्यूटी बढ़ी — जानें आप पर क्या पड़ेगा असर

होर्मुज क्राइसिस के बीच भारत सरकार का सख्त फैसला

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में बड़ा इजाफा किया है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की अधिसूचना के अनुसार, डीजल निर्यात पर अब ₹14 प्रति लीटर और ATF पर ₹12.5 प्रति लीटर की ड्यूटी लागू होगी — और ये दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका-ईरान के बीच तनाव भले ही कुछ कम हुआ हो, लेकिन वैश्विक पेट्रोलियम सप्लाई चेन अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। इसी को देखते हुए सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है।

क्या बदला, क्या नहीं?

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर कोई बदलाव नहीं किया है। इसके अलावा, घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी भी यथावत रहेगी — यानी आम उपभोक्ता के लिए पंप पर कीमतें नहीं बदलेंगी।

ड्यूटी क्यों बढ़ाई गई?

सरकार ने मार्च 2026 में ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर Special Additional Excise Duty (SAED) और Road & Infrastructure Cess (RIC) लागू किया था। इसका मकसद था — कंपनियों को जरूरत से ज्यादा निर्यात करने से रोकना और देश के भीतर ईंधन की कमी न होने देना।

सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की समीक्षा कर इन दरों को रिवाइज करती है। इससे पहले 1 जून को इन टैक्स दरों में संशोधन किया गया था।

‘घबराएं नहीं — देश में ईंधन की कोई कमी नहीं’

पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशवासियों को साफ भरोसा दिलाया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल, LPG और नेचुरल गैस की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय ने नागरिकों और उद्योगों से अपील की है कि वे ऊर्जा का जिम्मेदारी से उपयोग करें।

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ इलाकों में जो दबाव दिखा, वह सप्लाई की कमी नहीं बल्कि डिमांड पैटर्न में अचानक बदलाव की वजह से था।

असली दिक्कत कहां आई?

सरकार के अनुसार, मई महीने में औद्योगिक और कमर्शियल उपभोक्ताओं के निजी पंपों से करीब 42 करोड़ लीटर डीजल की खपत अचानक खुदरा पेट्रोल पंपों की तरफ शिफ्ट हो गई। इससे कई क्षेत्रों में रिटेल आउटलेट्स पर असामान्य दबाव पैदा हुआ।

इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 11 जून को एक अस्थायी आदेश जारी किया, जिसके तहत खुदरा पंपों से एक व्यक्ति को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही बेचा जा सकेगा।

90 दिनों की अस्थायी व्यवस्था

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियम करीब 90 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर लागू किया गया है। बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कंज्यूमर पंपों से ही डीजल लें, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।

पेट्रोलियम मंत्रालय का साफ संदेश है — पैनिक बायिंग की कोई जरूरत नहीं। सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आगे भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

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