नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चुनावी रण के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। विपक्षी दलों ने राज्यसभा में उन्हें हटाने की मांग को लेकर नया नोटिस दिया है।
73 सांसदों के समर्थन से दिए गए इस नोटिस में CEC कुमार पर ‘साबित दुर्व्यवहार’ का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और TMC नेता सागरिका घोष ने यह नोटिस राज्यसभा महासचिव को सौंपा है।
क्या हैं नए आरोप?
विपक्षी दलों ने CEC पर 9 नए आरोप लगाए हैं। इनमें सबसे गंभीर आरोप आदर्श आचार संहिता के पक्षपातपूर्ण प्रवर्तन का है। विपक्ष का आरोप है कि 18 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पश्चिम बंगाल में मतदाताओं का ‘mass disenfranchisement’ भी एक प्रमुख आरोप है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का मामला उठाया गया है।
संवैधानिक पदाधिकारी के अशोभनीय आचरण का आरोप
विपक्षी प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठकों के दौरान CEC के व्यवहार को भी निशाना बनाया गया है। प्रशासनिक चूक और चुनाव वाले राज्यों में नौकरशाहों के तबादले और पोस्टिंग में शक्ति का दुरुपयोग के आरोप भी लगे हैं।
विपक्ष का दावा है कि चुनाव आयोग भाजपा की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करता है, जबकि विपक्षी दलों की समान शिकायतों को नजरअंदाज किया जाता है।
दूसरी कोशिश, पहली अप्रैल में रिजेक्ट
यह विपक्षी दलों की CEC कुमार को हटाने की दूसरी कोशिश है। अप्रैल 2026 में उनके पहले नोटिस को दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों द्वारा खारिज कर दिया गया था।
कांग्रेस, TMC, SP, DMK, वाम दल, शिवसेना (UBT), NCP (SP), RJD और IUML सहित कई विपक्षी दलों का इस नोटिस को समर्थन प्राप्त है।
बंगाल में दूसरे चरण का चुनाव अभी बाकी है, ऐसे में यह विवाद चुनावी माहौल को और गर्म बना सकता है।

