अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में भारतीय मूल के सात उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, और इनमें दो नाम गुजरात की माटी से जुड़े हैं। डॉ. अमी बेरा और डॉ. अमीश शाह ने अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की ताकत को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
अमी बेरा: राजकोट से कैलिफोर्निया तक का सफर
अमी बेरा का असली नाम अमरीश बेरा है और उनका परिवार मूल रूप से गुजरात के राजकोट से ताल्लुक रखता है। उनके पिता पहले अमेरिका गए, फिर मां भी वहां पहुंचीं। लॉस एंजिल्स में जन्मे और ऑरेंज काउंटी में पले-बढ़े बेरा ने चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाया और सैक्रामेंटो काउंटी के चीफ मेडिकल ऑफिसर रहे।
कैलिफोर्निया के छठे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेट अमी बेरा ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को 57 प्रतिशत वोटों से हराया। इस जीत के साथ वह भारतीय मूल के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अमेरिकी कांग्रेस सदस्य बन गए हैं। यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, यह दशकों की मेहनत और भारतीय मूल्यों की जीत है।
अमीश शाह: एरिजोना में इतिहास रचा
शिकागो में जन्मे अमीश शाह इमरजेंसी मेडिसिन के विशेषज्ञ हैं और एरिजोना वेजिटेरियन फूड फेस्टिवल के संस्थापक भी। वह गुजराती के साथ-साथ स्पेनिश भी बोलते हैं, जो उनकी बहुसांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। उनके माता-पिता 1960 के दशक में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए भारत से अमेरिका गए थे।
एरिजोना के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमीश शाह ने पूर्व NFL खिलाड़ी थॉमस फीली को 52 प्रतिशत वोटों से हराया। वह एरिजोना से अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुने जाने वाले भारतीय मूल के पहले व्यक्ति बन गए हैं। यह रिकॉर्ड अपने आप में बोलता है।
मुख्य बातें जो इस जीत को खास बनाती हैं
भारतीय डायस्पोरा की नई राजनीतिक पहचान
अंकुर वैद्य ने इन नतीजों को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए एक turning point बताया। पहले यह समुदाय राजनीतिक दलों को समर्थन और फंड देता था, लेकिन अब वह खुद मैदान में उतर रहा है और जीत रहा है। यह बदलाव सिर्फ दो सीटों की बात नहीं, यह अमेरिकी सत्ता के गलियारों में भारत की आवाज़ को मजबूत करने की कहानी है।
गुजरात से निकले इन परिवारों ने अमेरिका में जो सपना बोया था, आज उसकी फसल पूरा भारत गर्व के साथ देख रहा है। अमी बेरा और अमीश शाह की जीत यह साबित करती है कि भारतीय मूल, मेहनत और सेवा की भावना किसी भी देश में सफलता की नींव बन सकती है।

