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21 साल बाद मध्य प्रदेश में लौटी सरकारी बस सेवा — यह सिर्फ बस नहीं, बड़ा बदलाव है

21 साल बाद मध्य प्रदेश में लौटी सरकारी बस सेवा — यह सिर्फ बस नहीं, बड़ा बदलाव है

मध्य प्रदेश में 21 साल का इंतजार खत्म हुआ। शुक्रवार को भोपाल के भेल दशहरा मैदान से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिमोट के जरिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ किया। गडकरी ने 351 बसों को हरी झंडी दिखाई। यह वही राज्य है जहाँ दो दशकों से सरकारी बसें सड़कों से गायब थीं।

इस सेवा के तहत भोपाल, इंदौर समेत सात प्रमुख शहरों में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन शुरू होगा। शहर से गाँव तक, गाँव से शहर तक — कनेक्टिविटी का यह नया जाल अब सरकारी नियंत्रण में बिछेगा। लोक परिवहन का यह पुनर्जन्म सिर्फ ट्रांसपोर्ट की बात नहीं है, यह करोड़ों आम नागरिकों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी बदलने की शुरुआत है।

इस सेवा का असली स्केल क्या है?

सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तार देने की योजना बनाई है। पहले साल में 1,500 बसें सड़कों पर उतारी जाएंगी। इसके बाद हर साल 2,500 से 3,000 बसें और जोड़ी जाएंगी — यानी यह सिर्फ एक लॉन्च नहीं, एक मिशन है। सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक 15,000 बसें चलें और प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक परिवहन सेवा पहुँचे।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि लोकपथ ऐप पर इन बसों की पूरी समय सारणी उपलब्ध होगी। यानी GenZ और डिजिटल-फर्स्ट यूज़र्स के लिए भी यह सेवा स्मार्टफोन-रेडी है। एक ऐप, पूरा शेड्यूल — बस बुक करो और निकल पड़ो।

BJP प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट कहा कि इस सेवा का सीधा फायदा किसानों, मजदूरों, युवाओं और महिलाओं को मिलेगा। यह वर्ग वही है जो अब तक महंगे प्राइवेट ट्रांसपोर्ट पर निर्भर था या फिर कनेक्टिविटी की कमी के कारण अवसरों से वंचित रहता था। सरकारी बस की वापसी इन्हीं लोगों के लिए असली गेम-चेंजर है।

मध्य प्रदेश की यह पहल भारत के उस बड़े विज़न का हिस्सा है जहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को विकास की रीढ़ माना जा रहा है। 21 साल की खामोशी के बाद जब सरकारी बसें फिर सड़कों पर दौड़ेंगी, तो यह सिर्फ एक परिवहन सेवा नहीं होगी — यह एक राज्य का आत्मविश्वास होगा, पहियों पर।

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