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लाल चौक पर जगमगाए दीये: PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर बदले हुए कश्मीर की तस्वीर

लाल चौक पर जगमगाए दीये: PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर बदले हुए कश्मीर की तस्वीर

वो लम्हा जो इतिहास बन गया

17 सितंबर 2026 — श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर सैकड़ों दीयों की रोशनी फैली हुई थी, और वो घंटाघर जो दशकों तक तनाव, पाबंदियों और खौफ का प्रतीक रहा, आज जश्न की लौ से जगमगा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया, लेकिन श्रीनगर के लाल चौक पर हुए ‘आशीर्वाद एक दीया’ कार्यक्रम की बात ही कुछ और थी — यह सिर्फ एक birthday celebration नहीं था, यह एक बदले हुए कश्मीर का सबसे powerful visual था। जम्मू-कश्मीर बीजेपी यूनिट के नेता, स्थानीय निवासी और देश के कोने-कोने से आए tourists कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे, दीये जला रहे थे और पीएम मोदी की दीर्घायु की दुआ मांग रहे थे।

इस दृश्य की असली ताकत तब समझ में आती है जब आप सोचते हैं कि महज कुछ साल पहले यही जगह कितनी अलग थी। जहां आज हजारों लोग बेखौफ होकर जश्न मना रहे हैं, वहां कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी एक साहसिक कार्य माना जाता था। यह परिवर्तन न केवल राजनीतिक है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक भी है — और यही इस उत्सव को इतना महत्वपूर्ण बनाता है।

लाल चौक का वो इतिहास जो भुलाया नहीं जा सकता

1980 में निर्मित यह क्लॉक टावर दशकों तक कश्मीर की राजनीतिक उथल-पुथल का केंद्र बिंदु रहा। 1990 के दशक में जब घाटी में आतंकवाद अपने चरम पर था, तब लाल चौक पर तिरंगा फहराना एक असंभव-सा कार्य प्रतीत होता था — एक ऐसी चुनौती जिसे स्वीकार करने के लिए असाधारण साहस चाहिए था। 1992 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को यहां तिरंगा फहराने के लिए भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच पहुंचना पड़ा था, और यह घटना उस दौर की विडंबना को बखूबी बयान करती है। कई वर्षों तक स्थिति इतनी नाजुक रही कि सरकारी कार्यक्रमों में भी राष्ट्रीय ध्वज को लाल चौक की बजाय केवल सुरक्षित और नियंत्रित स्थानों पर ही फहराया जाता था।

जम्मू-कश्मीर बीजेपी नेता अल्ताफ ठाकुर इस कार्यक्रम में भावुक हो उठे जब उन्होंने वो पुराना दौर याद किया। उन्होंने बताया कि 2011 में इसी घंटाघर पर तिरंगा फहराने की कोशिश करने वालों को पुलिस हथकड़ियां पहनाकर गिरफ्तार कर लेती थी। आज उसी लाल चौक पर हजारों लोग पीएम मोदी का जन्मदिन मना रहे हैं और बतौर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री उनकी 25 वर्षों की जनसेवा को गर्व से सलाम कर रहे हैं — यह बदलाव किसी क्रांति से कम नहीं।

अनुच्छेद 370 के बाद का नया कश्मीर

बीजेपी नेताओं ने इस परिवर्तन का श्रेय सीधे तौर पर मोदी सरकार के उन कड़े और ऐतिहासिक फैसलों को दिया, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण था अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण। अगस्त 2019 में लिए गए इस निर्णय ने जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया और उन विशेष प्रावधानों को समाप्त किया जो दशकों से घाटी को मुख्यधारा से अलग रखते थे। नेताओं ने जमीनी स्तर पर आए बदलावों के आंकड़े भी सामने रखे — सुरक्षा खतरों में नाटकीय गिरावट, रिकॉर्ड संख्या में पर्यटकों का आगमन, बेहतर infrastructure का निर्माण और आम कश्मीरियों का राष्ट्रीय मुख्यधारा के साथ बढ़ता जुड़ाव।

पर्यटन के आंकड़े इस बदलाव की सबसे ठोस गवाही देते हैं। जो घाटी कभी tourists के लिए no-go zone मानी जाती थी, वहां अब हर season में लाखों सैलानी पहुंच रहे हैं — और यह केवल संख्याओं की बात नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास की वापसी है जो कश्मीर के प्रति देश और दुनिया के मन में पनप रहा है। Dal Lake से लेकर Gulmarg तक, हर जगह एक नई ऊर्जा और नई उम्मीद दिखती है।

जश्न का संदेश: डर नहीं, अमन और तरक्की

लाल चौक पर जलाए गए दीये केवल एक नेता के जन्मदिन का उत्सव नहीं थे — वे उस सभ्यतागत निरंतरता और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक थे जिसे कश्मीर में स्थापित करने में दशकों लग गए। जब एक BJP नेता, एक स्थानीय कश्मीरी नागरिक और एक बाहर से आया tourist एक ही जगह, एक ही उद्देश्य से दीया जलाता है, तो वह दृश्य किसी भी राजनीतिक भाषण से अधिक eloquent होता है। यह वही कश्मीर है जिसके बारे में हर भारतीय सपना देखता था — एक ऐसा कश्मीर जहां जश्न हो, जहां अमन हो, जहां विकास हो।

‘आशीर्वाद एक दीया’ कार्यक्रम का समापन इसी संकल्प के साथ हुआ कि पीएम मोदी की अगुवाई में कश्मीर अब खौफ के अंधेरे से निकलकर तरक्की और खुशहाली के उजाले में कदम रख चुका है। घंटाघर की वो रोशनी सिर्फ मोमबत्तियों की लौ नहीं थी — वह एक पूरी पीढ़ी की उम्मीदों का प्रकाश था, एक नए भारत का प्रतिबिंब था, और इस बात का सबूत था कि जब राष्ट्रीय इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो इतिहास बदला जा सकता है।

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