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UPI पर MDR का फैसला पक्का — सरकार का दो-टूक जवाब, जानिए आप पर क्या पड़ेगा असर

UPI पर MDR का फैसला पक्का — सरकार का दो-टूक जवाब, जानिए आप पर क्या पड़ेगा असर

भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम एक नए मोड़ पर खड़ा है। सरकार ने साफ कर दिया है — UPI पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) का फैसला वापस नहीं होगा, और इस पर पुनर्विचार का कोई सवाल ही नहीं उठता।

15 अक्टूबर 2026 से यह नया फ्रेमवर्क लागू होगा, जिसके तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगेगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा, “इस फैसले पर पुनर्विचार का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।” यह बयान उस वक्त आया जब विपक्ष, व्यापारी संगठन और कुछ डिजिटल पेमेंट संस्थाएं इस कदम के खिलाफ सड़क से संसद तक शोर मचा रही हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “मोदी टैक्स” करार देते हुए प्रधानमंत्री पर अमेरिकी दबाव में काम करने का आरोप लगाया और प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग की। लेकिन वित्त मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि UPI से जुड़े सभी फैसले भारत की अपनी नीति और एक टिकाऊ, समावेशी तथा किफायती डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाने के उद्देश्य से लिए जा रहे हैं। यह भारत का आत्मनिर्भर डिजिटल भविष्य है — किसी बाहरी दबाव का नतीजा नहीं।

अब असली सवाल यह है कि यह नियम काम कैसे करेगा और आम आदमी पर इसका क्या असर पड़ेगा। नए फ्रेमवर्क के तहत ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है। यह राशि बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप से जुड़े पेमेंट इकोसिस्टम पार्टनर्स के बीच बांटी जाएगी — ताकि पूरा सिस्टम financially sustainable बने। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे जरूरी क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के पेमेंट पर सिर्फ ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का flat MDR लगेगा — यानी आम जरूरतों पर बोझ न्यूनतम रखा गया है।

सबसे जरूरी बात जो हर UPI यूजर को जाननी चाहिए — यह चार्ज ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। Person-to-Person (P2P) UPI पेमेंट किसी भी रकम का हो, बिल्कुल मुफ्त रहेगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट भी MDR से पूरी तरह मुक्त हैं। इसके अलावा, UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक पेमेंट पाने वाले छोटे व्यापारियों को भी Zero MDR की सुविधा जारी रहेगी। सरकार का दावा है कि करीब 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित ही नहीं होंगे।

यह पूरी बहस दरअसल एक बड़े सवाल को उजागर करती है — क्या UPI जैसा world-class डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर हमेशा के लिए मुफ्त चल सकता है? भारत ने UPI के जरिए दुनिया को दिखाया है कि real-time payments कैसे होते हैं। FY24 में UPI ने 131 बिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए — यह कोई छोटी बात नहीं। इस विशाल इन्फ्रास्ट्रक्चर को टिकाऊ बनाने के लिए एक sustainable revenue model जरूरी है, और MDR उसी दिशा में एक calculated कदम है। विरोध स्वाभाविक है, राजनीति भी होगी — लेकिन डिजिटल इंडिया का सपना तभी पूरा होगा जब इसकी नींव मजबूत और financially sound हो। भारत का UPI revolution रुकने वाला नहीं — बस evolve हो रहा है।

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