देशभर में आज सावन का पहला सोमवार धूमधाम से मनाया जा रहा है। शिव मंदिरों में सुबह से ही “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष गूंज रहे हैं, श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। लेकिन भक्ति के इस पावन मौके पर कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां हैं जो अनजाने में व्रत को अधूरा कर सकती हैं — और इनसे बचना बेहद ज़रूरी है।
मान्यता है कि सावन के सोमवार को सच्चे मन से भोलेनाथ की आराधना और जलाभिषेक करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि यह दिन करोड़ों हिंदुओं के लिए सिर्फ एक पूजा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव है।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं, क्या नहीं?
सबसे पहली और ज़रूरी बात — भगवान शिव को हल्दी, सिंदूर या कुमकुम अर्पित न करें। ये चीजें देवी पूजा के लिए हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, गंगाजल और बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। तुलसी के पत्ते और केतकी (केवड़ा) का फूल भी शिवजी को अर्पित नहीं किए जाते — यह धार्मिक परंपरा में स्पष्ट रूप से वर्जित है।
बेलपत्र चढ़ाते वक्त ध्यान रखें कि वो तीन पत्तियों वाला, साफ और बिना टूटा हुआ हो। कीड़े लगे, सूखे या फटे बेलपत्र न चढ़ाएं। परंपरा यह है कि बेलपत्र की चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखकर अर्पित करें।
अगर आप दूध से अभिषेक कर रहे हैं, तो उसके बाद साफ जल ज़रूर चढ़ाएं — इससे शिवलिंग की शुद्धि मानी जाती है। अभिषेक का जल या दूध इधर-उधर न फैलाएं और पूजा स्थल हमेशा साफ-सुथरा रखें।
जलाभिषेक में जल्दबाजी बिल्कुल न करें। ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए, धीरे-धीरे और शांत मन से जल चढ़ाएं। पूजा दिखावे के लिए नहीं, पूरी आस्था और भक्ति के साथ होनी चाहिए।
सावन सोमवार के व्रत में सात्विकता का विशेष महत्व है। इस दिन क्रोध, झूठ, अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचें। मंदिर में भीड़ हो तो धक्का-मुक्की न करें, दूसरों की पूजा में बाधा न डालें। और अगर किसी कारण मंदिर जाना संभव न हो, तो घर पर ही शिव ध्यान, मंत्र जाप और शिव चालीसा का पाठ करें — भोलेनाथ तक आपकी भक्ति पहुंचेगी ज़रूर।

