तालिबान का बड़ा बयान — पाकिस्तान को चेतावनी, भारत को दोस्त
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए भारत के साथ ऐतिहासिक और मजबूत संबंधों की खुलेआम पुष्टि की है। तालिबान सरकार में सूचना और संस्कृति मंत्री मुहाजिर फराही ने India Today को दिए एक इंटरव्यू में यह बयान दिया। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा तनाव चरम पर है।
फराही ने साफ कहा — “हमें कोई यह नहीं सिखा सकता कि हमें किससे दोस्ती करनी चाहिए और किससे नहीं।” यह एक सीधा संदेश था इस्लामाबाद को। और Bharat के लिए? एक बड़ा diplomatic जीत।
पाकिस्तानी हमलों पर तालिबान का पलटवार
तालिबान सरकार ने खुलासा किया कि पाकिस्तानी हमलों में 38 नागरिक मारे गए और 163 लोग घायल हुए — जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इस्लामाबाद की इस “सैन्य सरकार” को करारा जवाब देने की बात फराही ने बेबाकी से कही।
भारत ने भी इन हमलों को “खुली आक्रामकता और क्षेत्रीय शांति के लिए सीधा खतरा” करार दिया। New Delhi और Kabul — दोनों एक ही पेज पर हैं। यह coincidence नहीं, यह strategic alignment है।
भारत के साथ रिश्ते — “पड़ोसी हैं, इतिहास साझा है”
यह बयान सीधे तौर पर Pakistan को reject करता है। Kabul अब Islamabad की छाया से बाहर निकलना चाहता है — और New Delhi की तरफ देख रहा है।
पाकिस्तान bypass, नए Trade Corridors का निर्माण
फराही ने एक और बड़ी बात कही। पाकिस्तान के साथ सीमा चौकियां बार-बार बंद रहने की वजह से अफगानिस्तान ने नए रास्ते खोज लिए हैं। अब Kabul Pakistan पर निर्भर नहीं रहेगा।
यह Pakistan के लिए एक बड़ा झटका है। अफगानिस्तान धीरे-धीरे Pakistan को geopolitically irrelevant बना रहा है। और इस पूरे खेल में India की position मजबूत हो रही है।
बगराम एयरबेस — ट्रंप को तालिबान का सीधा जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार बगराम एयरबेस को वापस लेने की बात कही है। उनका तर्क है कि यह बेस China के करीब है और अमेरिका को इसे रखना चाहिए था। फराही का जवाब? “ट्रंप को बगराम केवल सपनों में ही मिलेगा।”
बगराम एयरबेस काबुल के उत्तर में स्थित है। इसे Soviet Union ने बनवाया था। 9/11 के बाद यह अमेरिकी सेना का मुख्य अड्डा बना, लेकिन अगस्त 2021 में US की वापसी के बाद यह तालिबान के कब्जे में आ गया। अब यह Kabul की संप्रभुता का प्रतीक है — और तालिबान इसे किसी को नहीं देगा।
भारत के लिए क्या मायने रखता है यह सब?
यह सिर्फ एक interview नहीं है। यह एक geopolitical signal है। अफगानिस्तान का Pakistan से दूर होना और India की तरफ झुकाव — यह South Asia की power dynamics को बदल सकता है।
Pakistan पहले से ही IMF loans, internal terrorism और economic collapse से जूझ रहा है। अब उसका पड़ोसी अफगानिस्तान भी उसे publicly reject कर रहा है। Bharat Mata की jai — क्योंकि इस बदलते समीकरण में India clearly एक winner है।

