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आज का पंचांग 3 जुलाई 2026: आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी, शुभ मुहूर्त और गणेश पूजा का संपूर्ण विवरण

आज का पंचांग 3 जुलाई 2026: आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी, शुभ मुहूर्त और गणेश पूजा का संपूर्ण विवरण

हमारी वैदिक परंपरा में पंचांग केवल एक कैलेंडर नहीं है — यह हमारे पूर्वजों की उस अद्भुत खगोलीय दृष्टि का प्रमाण है जो हजारों वर्षों से भारतीय जीवन को दिशा देती आई है। आज, 3 जुलाई 2026, शक संवत 1948 और विक्रम संवत 2083 के अनुसार आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी का पावन दिन है — और इस दिन का हर पल अपने भीतर एक विशेष ऊर्जा समेटे हुए है।

दिन की शुरुआत तृतीया तिथि से होती है, जो दोपहर 11 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि का शुभारंभ होगा, जो इस दिन को विशेष रूप से गणेश भक्तों के लिए महत्वपूर्ण बना देती है। सूर्य इस समय उत्तरायण में हैं, उत्तर गोल में स्थित हैं, और वर्षा ऋतु अपने पूरे यौवन पर है — धरती हरी-भरी है, आसमान मेघाच्छादित है, और भारत की माटी एक बार फिर अपनी शाश्वत लय में धड़क रही है।

नक्षत्रों की बात करें तो श्रवण नक्षत्र दोपहर 11 बजकर 46 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र का आगमन होगा। योग की दृष्टि से विष्कम्भ योग सायं 5 बजे तक रहेगा और तत्पश्चात प्रीति योग का मंगलकारी प्रारंभ होगा। करण में विष्टि (भद्रा) दोपहर 11:20 तक रहेगी, उसके बाद बव करण लागू होगा। चंद्रमा आज रात मकर राशि में विचरण करेंगे और कल मध्यरात्रि बाद 12 बजकर 48 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे।

सूर्योदय प्रातः 05:28 बजे होगा और सूर्यास्त सायं 07:23 बजे। चंद्रोदय रात्रि 09:53 बजे होगा जबकि चंद्रास्त अगली सुबह 08:07 बजे

अब बात करते हैं उन शुभ मुहूर्तों की, जिन्हें जानना हर उस भारतीय के लिए ज़रूरी है जो अपने दिन को सार्थक बनाना चाहता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 03:55 से 04:41 बजे तक रहेगा — यह वह समय है जब ध्यान, मंत्र जाप और आत्मचिंतन का फल कई गुना बढ़ जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:57 से 12:53 बजे तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के आरंभ के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। अमृत काल कल तड़के 04 जुलाई को 02:29 बजे से 04:12 बजे तक रहेगा।

जिन समयों से बचना चाहिए, उनमें राहुकाल सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक है। गुलिकाल सुबह 07:30 से 09:00 बजे तक और यमगण्ड दोपहर 03:30 से शाम 05:00 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में कोई भी नया या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से बचें।

आज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी है — भगवान गणेश की आराधना का विशेष पर्व। आज विघ्नहर्ता को दूर्वा और मोदक अर्पित करें, संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें, और मन की हर उलझन को उनके चरणों में समर्पित कर दें। गणेश जी केवल एक देवता नहीं हैं — वे उस भारतीय चेतना के प्रतीक हैं जो हर बाधा को बुद्धि और धैर्य से पार करती है।

यह पंचांग हमें याद दिलाता है कि हमारी सनातन परंपरा कितनी वैज्ञानिक, कितनी जीवंत और कितनी प्रासंगिक है। जब पूरी दुनिया डिजिटल घड़ियों पर निर्भर है, हम वैदिक काल से चले आ रहे उस ज्ञान को अपनी जेब में लिए चलते हैं जो ग्रहों, नक्षत्रों और ऋतुओं के साथ हमारे जीवन को संरेखित करता है। यही है भारत की असली ताकत — और यही है हमारी पहचान।

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