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UPI पर चार्ज लगेगा क्या? बैंकों का बढ़ता बोझ और RBI का जवाब — जानिए पूरी सच्चाई

UPI पर चार्ज लगेगा क्या? बैंकों का बढ़ता बोझ और RBI का जवाब — जानिए पूरी सच्चाई

UPI फ्री रहेगा या लगेगा चार्ज? RBI ने तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली। भारत का UPI सिस्टम दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्क बन चुका है — लेकिन अब इसकी सफलता ही बैंकों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। ₹5, ₹7 और ₹10 जैसे छोटे-छोटे UPI ट्रांजेक्शन की बाढ़ से बैंकों की operational cost आसमान छू रही है, और वे RBI से UPI पर चार्ज लगाने की मांग कर रहे हैं।

छोटे नोटों की किल्लत — असली जड़ यहाँ है

RBI अधिकारियों ने दैनिक जागरण को बताया कि बाजार में छोटे denomination के नोटों की भारी कमी है, जिसकी वजह से लोग ₹5-₹10 के भुगतान भी UPI से कर रहे हैं। RBI की 29 मई 2026 को जारी Annual Report के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक ₹2 और ₹5 के नोटों की हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 6.4% रह गई, जो पिछले साल 7.5% थी।

₹10 और ₹20 के नोट भी circulation में कम हो रहे हैं — ₹10 की हिस्सेदारी 17% से घटकर 16.1% और ₹20 की 9.1% से 8.2% पर आ गई। RBI का कहना है कि इस कमी को दूर करने में कम से कम 2 साल लग सकते हैं।

बैंकों पर कितना पड़ रहा है बोझ?

हर UPI ट्रांजेक्शन को process करने में बैंकों का औसत खर्च ₹1 से ₹2 प्रति ट्रांजेक्शन है। ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाता, इसलिए यह पूरा बोझ बैंकों पर पड़ता है।

NPCI का per-transaction cost भले ही कम हो, लेकिन जैसे-जैसे transactions की संख्या बढ़ रही है, बैंकों को अपने IT infrastructure पर भारी निवेश करना पड़ रहा है। छपाई की बढ़ती लागत और distribution की कमी के चलते छोटे नोटों की supply और घट रही है।

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बैंकों की मांग — और RBI का रुख

बैंक लगातार RBI से अपील कर रहे हैं कि ₹1,000 से अधिक के UPI transactions पर charge लगाने की अनुमति दी जाए। RBI इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, लेकिन अंतिम फैसला केंद्र सरकार को लेना है।

RBI Governor संजय मल्होत्रा ने कुछ समय पहले कहा था कि “UPI हमेशा charge-free नहीं रह सकता।” हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल UPI पर कोई charge लगाने का प्रस्ताव नहीं है।

ATM Upgrade — बैंक क्यों हैं तैयार नहीं?

RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि ₹50 और ₹100 के नोटों का वितरण बढ़ाएं। लेकिन इसके लिए ATM machines को upgrade करना होगा — और यह काम financially बेहद महंगा है।

यही वजह है कि अधिकतर बैंक इस upgrade के लिए तैयार नहीं हैं, और छोटे नोटों की किल्लत जस की तस बनी हुई है। नतीजा — UPI पर छोटे transactions का बोझ और बढ़ता जा रहा है।

Bottom Line — आपकी जेब पर क्या असर?

अभी के लिए UPI बिल्कुल फ्री है और रहेगा। लेकिन जिस रफ्तार से transactions बढ़ रहे हैं और बैंकों का दबाव बढ़ रहा है, आने वाले वक्त में बड़े UPI payments पर nominal charge की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फैसला सरकार के हाथ में है — और यह फैसला करोड़ों Indians की digital payment habits को सीधे affect करेगा।

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