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मिडिल-ईस्ट में मिसाइलें, भारत में महंगाई की आहट: ब्रेंट क्रूड $96 के पार, पेट्रोल-डीजल पर मंडराया खतरा

मिडिल-ईस्ट में मिसाइलें, भारत में महंगाई की आहट: ब्रेंट क्रूड $96 के पार, पेट्रोल-डीजल पर मंडराया खतरा

ईरान-इज़राइल तनाव से कच्चा तेल भड़का, भारत की जेब पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट में ईरान द्वारा इज़राइल पर मिसाइल हमले के बाद सोमवार, 8 जून 2026 को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया। एशियाई बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड 3.6% की बढ़त के साथ 96.47 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया — और भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका एक बार फिर गहरा गई है।

$96 के पार निकला ब्रेंट क्रूड, WTI भी दौड़ा

सोमवार की सुबह शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 96.47 डॉलर प्रति बैरल तक उछला। बाद में थोड़ी नरमी के साथ यह 2.45% की बढ़त पर 95.34 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था।

अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी तेजी से बढ़कर 94 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा, हालांकि बाद में हल्की गिरावट के साथ 92.58 डॉलर पर आ गया।

ईरान का रुख साफ — “जब तक इज़राइल नहीं रुकेगा, हम नहीं रुकेंगे”

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इज़राइल लेबनान पर हमले बंद नहीं करता, तब तक वह अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। यह बयान मिडिल-ईस्ट में लंबे संघर्ष का संकेत है — और इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है।

OPEC+ का प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला — लेकिन राहत मुश्किल

तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC+ ने जुलाई से रोजाना 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। लेकिन यह फैसला जमीन पर उतरना मुश्किल लग रहा है।

सबसे बड़ी बाधा है होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी नाकेबंदी। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है — और यह रास्ता अभी खतरे में है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85% से अधिक आयात करता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सीधे पेट्रोल-डीजल के दाम पर असर डालती हैं — और इससे महंगाई की आग और भड़क सकती है।

जब तक युद्ध, तब तक महंगाई

जब तक मिडिल-ईस्ट में तनाव खत्म नहीं होता, कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। भारत सहित पूरी दुनिया पर महंगे पेट्रोल-डीजल की तलवार लटकती रहेगी।

यह वक्त है कि भारत अपनी एनर्जी इंडिपेंडेंस — सोलर, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी — की रफ्तार और तेज करे। बाहरी तेल पर निर्भरता ही असली कमजोरी है।

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