रायपुर से एक ऐसी कहानी आ रही है जो सिर्फ सरकारी योजना की नहीं, बल्कि एक महिला के आत्मसम्मान की है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महतारी वंदन योजना की शुरुआत की, जिसका मकसद था प्रदेश की विवाहित महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये की सीधी आर्थिक सहायता देना। यह योजना कागजों पर नहीं, जमीन पर असर दिखा रही है, और इसकी सबसे जीवंत मिसाल हैं सरगुजा जिले की रानी सिंह।
रानी सिंह अम्बिकापुर जनपद पंचायत कार्यालय के परिसर में एक छोटी सी कैंटीन चलाती हैं। कैंटीन की आमदनी से दैनिक खर्च तो निकल जाता था, लेकिन त्योहारों पर या किसी अतिरिक्त जरूरत के वक्त हाथ तंग पड़ जाता था। महतारी वंदन योजना ने उस खाई को पाटना शुरू किया। हर महीने खाते में आने वाली राशि ने उन्हें एक अलग किस्म की आज़ादी दी, वह आज़ादी जो किसी के सामने हाथ न फैलाने से मिलती है।
दीपावली से ठीक पहले जब उनके खाते में यह राशि आई, तो रानी सिंह की खुशी छुपाए नहीं छुपी। उन्होंने बताया कि इस बार लक्ष्मी पूजा के लिए दीये, बाती और पूजा सामग्री खरीदने की चिंता नहीं रही। “मुख्यमंत्री विष्णु भैया ने दीपावली से पहले ही पैसा भेज दिया,” उन्होंने कहा, “अब इन छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।” यह एक वाक्य पूरे योजना की आत्मा को बयान करता है।
रानी सिंह अकेली नहीं हैं। सरगुजा जिले की तमाम महिलाएं इस राशि का उपयोग घरेलू जरूरतों, आजीविका गतिविधियों और परिवार की छोटी-बड़ी खुशियों के लिए कर रही हैं। नियमित आमदनी का यह भरोसा उनके भीतर आत्मविश्वास जगा रहा है, वह आत्मविश्वास जो किसी सरकारी भाषण से नहीं, बल्कि अपने पैसे से अपनी जरूरत पूरी करने के अनुभव से आता है।
महतारी वंदन योजना के तहत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये सीधे बैंक खाते में दिए जाते हैं। यह राशि छोटी लग सकती है, लेकिन जब यह किसी महिला को खुद निर्णय लेने की ताकत देती है तो इसका मूल्य कहीं ज्यादा हो जाता है। रानी सिंह के शब्दों में, यह योजना सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने वाली पहल है।
छत्तीसगढ़ की यह पहल उस बड़े सच को रेखांकित करती है जिसे आज का भारत समझ चुका है, असली सशक्तिकरण तब होता है जब महिला खुद तय करे कि उसका पैसा कहां जाएगा।

