उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से बिसात बिछने लगी है। हर दल अपनी रणनीति तैयार कर रहा है, हर बयान एक राजनीतिक संकेत बन रहा है। इसी माहौल में योग गुरु बाबा रामदेव ने एक ऐसा बयान दिया है जो यूपी के पूरे चुनावी समीकरण को समझने की चाबी बन सकता है।
संभल जिले के बबराला में आयोजित प्रांतीय आर्य महासम्मेलन के बाद पत्रकारों से बात करते हुए रामदेव ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी बाकी जगहों के लिए कुछ भी हों, लेकिन उत्तर प्रदेश के लिए वे “उत्तम” हैं। यह बयान सुनने में हल्का लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की राजनीतिक गणित बेहद गहरी है।
दरअसल, रामदेव से ओवैसी के उस विवादित बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी जिसमें AIMIM प्रमुख ने कहा था कि अगर अखिलेश यादव की सरकार नहीं बनी तो “अब्दुल की सरकार” बनेगी। रामदेव का जवाब सीधा और स्पष्ट था — ओवैसी के चुनावी मैदान में उतरने से कुछ वर्गों के वोट बंटेंगे और इसका सीधा राजनीतिक लाभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिलेगा।
यह कोई नई बात नहीं है। समाजवादी पार्टी पहले दिन से ओवैसी की AIMIM को भाजपा की “बी टीम” कहती आई है। उनका तर्क है कि जब भी ओवैसी किसी राज्य में सक्रिय होते हैं, मुस्लिम वोट विभाजित होते हैं और विपक्ष कमजोर पड़ जाता है। बिहार के 2020 विधानसभा चुनाव में AIMIM ने सीमांचल क्षेत्र में यही भूमिका निभाई थी — पांच सीटें जीतीं, लेकिन दर्जनों सीटों पर विपक्ष की हार में योगदान दिया।
यूपी का गणित और भी पेचीदा है। प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 19-20 प्रतिशत है और वे पारंपरिक रूप से सपा के साथ खड़े रहे हैं। अगर AIMIM इस वोटबैंक में सेंध लगाती है, तो अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति सीधे प्रभावित होती है। रामदेव ने इसी समीकरण को रेखांकित किया।
इस बयान के साथ ही रामदेव ने सनातन धर्म पर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने माना कि पाखंड, अंधविश्वास और धार्मिक ढोंग के कारण सनातन की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। उनका कहना था कि इन बुराइयों को दूर किए बिना सनातन धर्म को उसकी असली पहचान नहीं मिल सकती। यह आत्मालोचन उतना ही जरूरी है जितना बाहरी चुनौतियों का सामना करना।
2027 अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक बिसात अभी से सज रही है। ओवैसी का यूपी में सक्रिय होना, रामदेव का यह बयान और भाजपा की चुप्पी — ये सब मिलकर एक बड़ी तस्वीर बनाते हैं। योगी आदित्यनाथ की सरकार अपने काम और हिंदुत्व की राजनीति के दम पर मैदान में है, और अगर विपक्ष का वोट बंटता है तो भाजपा के लिए हैट्रिक की राह और आसान हो सकती है।

