रेल मंत्रालय का बड़ा खुलासा
नई दिल्ली, बुधवार। रेल मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को सिरे से भ्रामक करार दिया है, जिनमें भारतीय ट्रेनों के समय पालन यानी punctuality में भारी गिरावट का आरोप लगाया जा रहा था। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पिछले आठ वर्षों में भारतीय रेलवे के प्रदर्शन में उल्लेखनीय और निरंतर सुधार हुआ है, और जो आंकड़े सोशल मीडिया पर घुमाए जा रहे हैं, वे संदर्भ से काटकर पेश किए गए हैं।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि 2018-19 में जो समय पालन दर मात्र 69.2 प्रतिशत थी, वह 2025-26 में बढ़कर 77.43 प्रतिशत हो गई और चालू वर्ष 2026-27 में अब तक 77.11 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं — यह उस विशाल रेल नेटवर्क की कहानी है जो हर रोज़ करोड़ों भारतीयों को उनकी मंज़िल तक पहुँचाता है।
तीन साल से लगातार 77% से ऊपर
अधिकारी ने आगे बताया कि मौजूदा वर्ष समेत पिछले तीन वर्षों में समय पालन लगातार 77 प्रतिशत से अधिक रहा है। यह आंकड़ा 2023-24 के 73.62 प्रतिशत के मुकाबले स्पष्ट रूप से बेहतर है, जो दर्शाता है कि सुधार की दिशा सही और टिकाऊ है।
अधिकारियों ने यह भी रेखांकित किया कि कोरोना महामारी के दौरान 2020-21 और 2021-22 में समय पालन के जो असाधारण रूप से ऊंचे आंकड़े दर्ज हुए थे, वे उस दौर की देन थे जब देश में बेहद सीमित संख्या में ट्रेनें चलाई जा रही थीं। उन आंकड़ों को आज के सामान्य परिचालन से तुलना करना सरासर गलत और भ्रामक है।
बेहतर बुनियादी ढांचा, बेहतर सफर
रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह सुधार अपने आप नहीं आया। बेहतर निगरानी प्रणाली, समय-सारिणी का युक्तिसंगत निर्धारण, रखरखाव में निवेश और बुनियादी ढांचे के व्यापक उन्नयन ने मिलकर यह बदलाव संभव किया है। अधिक यात्री मांग और बढ़ते परिचालन दबाव के बावजूद भारतीय रेलवे ने न केवल punctuality बनाए रखी, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं में भी सुधार किया।
यह वही भारतीय रेलवे है जो आज वंदे भारत जैसी अत्याधुनिक ट्रेनें चला रही है, नए रूटों पर विस्तार कर रही है और डिजिटल टिकटिंग से लेकर real-time ट्रैकिंग तक — हर मोर्चे पर आधुनिकता की ओर बढ़ रही है।
सोशल मीडिया पर फैली गलतफहमी
मंत्रालय ने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित आंकड़े संदर्भ से बाहर निकालकर इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिससे आम जनता में भ्रम फैल रहा है। GenZ और युवा भारतीयों को चाहिए कि वे किसी भी वायरल दावे को share करने से पहले उसके source और context को verify करें — क्योंकि half-truth, झूठ से भी ज़्यादा खतरनाक होती है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

