भारत का ऑटो बाजार इस त्योहारी सीजन में इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है। नवरात्रि और दशहरा से पहले ही डीलरशिप्स पर बुकिंग की बाढ़ आ गई है, और जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वो बताते हैं कि अक्टूबर 2025 भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक landmark महीना बन सकता है।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स यानी FADA के ताज़े सर्वे के मुताबिक, 75.57 फीसदी डीलरों को अक्टूबर में बिक्री बढ़ने का पूरा भरोसा है। सितंबर से पहले यह आंकड़ा महज 67.09 फीसदी था, यानी सिर्फ कुछ हफ्तों में भरोसे का यह ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है। करीब 63 फीसदी डीलरों ने साफ कहा कि उनके पास बुकिंग का जबरदस्त ऑर्डर जमा है।
सितंबर 2025 का महीना तो पहले ही इतिहास में दर्ज हो चुका है। FADA के आंकड़ों के अनुसार, त्योहारी मांग और पिछले साल के low base की वजह से घरेलू रिटेल बिक्री सालाना आधार पर 31.82 प्रतिशत उछलकर रिकॉर्ड 25,36,920 यूनिट्स तक पहुंच गई। इंडस्ट्री ने छह में से पांच व्हीकल कैटेगरी में अब तक की सबसे बेहतरीन मासिक बिक्री दर्ज की, जो इस बात का सबूत है कि भारत की purchasing power और consumer confidence दोनों नई ऊंचाइयों पर हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के बीच 1,55,12,319 यूनिट्स की रिकॉर्ड रिटेल बिक्री हुई, जो पिछले साल की इसी अवधि से 20.77 प्रतिशत अधिक है। यह नंबर सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है — यह भारत की आर्थिक रफ्तार का जीता-जागता सबूत है।
Electric vehicles की कहानी तो और भी रोमांचक है। सितंबर में EV की रिटेल बिक्री लगभग 3.34 लाख यूनिट के अब तक के सबसे ऊंचे मासिक स्तर पर पहुंची। भारतीय ऑटो बाजार में कुल EV penetration बढ़कर करीब 13 फीसदी हो गई है, जबकि पैसेंजर कारों में ईवी की हिस्सेदारी 8.45 फीसदी रही। यह उस भारत की तस्वीर है जो पेट्रोल-डीजल की दुनिया से आगे निकलकर clean और tech-driven mobility की ओर बढ़ रहा है।
पितृ पक्ष के दौरान जो खरीदारी रुकी हुई थी, वो अब नवरात्रि और दशहरा की शुभ घड़ी में डिलीवरी का रूप ले रही है। यह भारत की सांस्कृतिक परंपरा और आर्थिक ताकत का अनोखा संगम है — जहां हमारे पर्व सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि economy के engine भी बन जाते हैं।
डीलरों ने इस मांग को भांपते हुए यात्री वाहनों का स्टॉक भी पहले से तैयार कर लिया है। सितंबर में यह स्टॉक 43 से 45 दिनों तक पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह 38 से 40 दिन था। FADA के अध्यक्ष साई गिरिधर ने कहा कि त्योहारी बिक्री से पहले 45 दिनों का यह स्टॉक level बिल्कुल सही है, क्योंकि इस दौरान डीलर सामान्य मासिक बिक्री की 1.5 से 2 गुना तक गाड़ियां बेचते हैं।
टू-व्हीलर सेगमेंट सितंबर में भी सबसे ज़्यादा बिकने वाली कैटेगरी बना रहा, जो दिखाता है कि भारत का मध्यम वर्ग और युवा उपभोक्ता इस growth का असली इंजन हैं। हाँ, 17.65 फीसदी डीलरों को बाजार के स्थिर रहने का अनुमान है और करीब 4 फीसदी को हल्की गिरावट की आशंका है, लेकिन ये आवाजें इस उत्सव के शोर में बेहद कमज़ोर हैं।
यह सिर्फ गाड़ियों की बिक्री नहीं है — यह उस नए भारत की धड़कन है जो अपनी सभ्यता के पर्वों को मनाते हुए दुनिया की सबसे तेज़ रफ्तार अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। जय हो।

