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Justice Bhuiyan का बड़ा बयान: CEC Gyanesh Kumar पर विपक्ष का हमला तेज, देशभर में प्रदर्शन

Justice Bhuiyan का बड़ा बयान: CEC Gyanesh Kumar पर विपक्ष का हमला तेज, देशभर में प्रदर्शन

लोकतंत्र की जड़ों पर सवाल

भारत की राजनीति इन दिनों एक बड़े तूफान के बीच खड़ी है। Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष पहले से ही आक्रामक था — और अब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां के एक धारदार बयान ने इस पूरी बहस को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। यह सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं है; यह भारत के संवैधानिक लोकतंत्र की नींव पर उठता हुआ एक गंभीर सवाल है।

हैदराबाद की NALSAR Law University में बोलते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि लाखों भारतीय नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया किसी भी तर्क से न्यायसंगत नहीं ठहराई जा सकती — यह संविधान के मूल ढांचे पर सीधा हमला है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मृत मतदाता के अलावा, एक बार voter list में नाम दर्ज होने के बाद उसे बिना नोटिस और सुनवाई के हटाया नहीं जा सकता।

विपक्ष ने लपका मौका, कांग्रेस-TMC एक सुर में

जस्टिस भुइयां के इस बयान को विपक्ष ने तुरंत अपना हथियार बना लिया। TMC नेता महुआ मोइत्रा ने X पर लिखा कि जब कोई मौजूदा जज सत्ता के सामने सच बोलता है, तो यह एक मिसाल बन जाती है — जस्टिस भुइयां की तारीफ होनी चाहिए। यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर viral हो गई और लाखों युवा भारतीयों तक पहुंची।

कांग्रेस ने और आगे जाकर कहा कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणियां साफ साबित करती हैं कि CEC ने संविधान की अक्षरश: और उसकी मूल भावना — दोनों का उल्लंघन किया है। जयराम रमेश ने इससे जुड़ा पोस्ट शेयर करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि अब उनके पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचा।

मुंबई की सड़कों पर ‘गर्जना मोर्चा’

मुंबई में Shiv Sena (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और Maharashtra Navnirman Sena (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे ने मिलकर CEC के खिलाफ ‘गर्जना मोर्चा’ निकाला — Metro Cinema से BMC Headquarters तक। इस संयुक्त मार्च में Communist parties, किसान संगठन और Workers’ Party भी शामिल हुए, जो इसकी व्यापकता को दर्शाता है। मुंबई पुलिस ने बिना अनुमति के मार्च निकालने पर आयोजकों के खिलाफ केस दर्ज किया।

राज ठाकरे ने मंच से कहा कि वोट चोरी का यह सवाल 2017 से उनके मन में था, जब उन्होंने सोनिया गांधी और ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। उन्होंने SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने और ballot paper से चुनाव कराने की मांग की। उद्धव ठाकरे ने Election Commission की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले जो समिति थी उसमें CJI, PM और विपक्ष के नेता होते थे — लेकिन केंद्र सरकार ने CJI को हटाकर उनकी जगह अमित शाह को बैठा दिया।

दिल्ली में CJP का प्रदर्शन और पुलिस पर गंभीर आरोप

राजधानी दिल्ली में CJP (Citizens for Justice and Peace) के प्रवक्ता सौरव दास की अगुवाई में Sansad Marg थाने के बाहर बड़ा प्रदर्शन हुआ। यह प्रदर्शन उस कथित बदसलूकी के खिलाफ था जो शनिवार को तीन महिला पत्रकारों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा की गई बताई जाती है। तीनों पत्रकारों ने ACP विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है, जबकि दिल्ली पुलिस ने मामले को Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया।

CJP का आरोप है कि पुलिस FIR दर्ज करने से इनकार कर आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है — यह आरोप अगर सच है, तो यह संस्थागत जवाबदेही के संकट को और गहरा करता है।

AISA की नेहा बोरा की detention और रिहाई

AISA (All India Students Association) की अध्यक्ष नेहा बोरा और Yogendra Yadav समेत कई प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। AISA का आरोप है कि बिना महिला पुलिसकर्मी के नेहा को अज्ञात जगह ले जाया गया। बाद में उन्हें Narela Industrial Area Police Station से रिहा किया गया, हालांकि उनका फोन और बैग वापस नहीं किया गया था।

रिहाई के बाद नेहा बोरा ने एक video जारी करते हुए कहा कि यह देश के नागरिकों का अधिकार है कि वे सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछें — चाहे ECI हो या ruling party, जवाबदेही मांगना लोकतंत्र की आत्मा है। उनका यह बयान GenZ की उस आवाज को represent करता है जो डरने से इनकार करती है।

संविधान की रक्षा — असली सवाल यही है

जस्टिस भुइयां का बयान, उद्धव-राज ठाकरे का गर्जना मोर्चा, नेहा बोरा की हिरासत और कांग्रेस का हमला — ये सब अलग-अलग धाराएं हैं, लेकिन सब एक ही सवाल की तरफ बहती हैं: क्या भारत का चुनावी तंत्र हर नागरिक के vote की रक्षा कर पा रहा है? यह सवाल किसी एक दल का नहीं, यह भारत के हर उस युवा का सवाल है जो 2047 के Viksit Bharat में एक मजबूत और पारदर्शी लोकतंत्र देखना चाहता है। जवाब जल्द आना चाहिए।

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