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राजस्थान निकाय चुनाव 2025: BJP का शहरी राज — 10 में से 9 नगर निगमों पर कब्जा, Congress की गुटबाजी ने डुबोई नैया

राजस्थान निकाय चुनाव 2025: BJP का शहरी राज — 10 में से 9 नगर निगमों पर कब्जा, Congress की गुटबाजी ने डुबोई नैया

भाजपा का शहरी राजस्थान पर दबदबा

जयपुर, राजस्थान। राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए प्रदेश के 10 नगर निगमों में से 9 पर अपना महापौर बिठा दिया है। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में महापौर पद के ताजा नतीजों के बाद यह तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। कांग्रेस को केवल बीकानेर में सफलता मिली, जहाँ वह महापौर की कुर्सी बचाने में कामयाब रही। BJP ने अजमेर, उदयपुर, अलवर, पाली, भरतपुर और भीलवाड़ा समेत बाकी सभी प्रमुख शहरों में मेयर पद हासिल किया। यह नतीजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की “ट्रिपल इंजन सरकार” की साख को शहरी मतदाताओं के बीच मजबूती से स्थापित करते हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 309 नगरीय निकायों में चुनाव हुए, जिनमें से 302 में अध्यक्ष पद के परिणाम घोषित हो चुके हैं। BJP ने कुल 200 निकायों में बोर्ड बनाया है, जबकि कांग्रेस केवल 94 निकायों तक सिमट गई है — दोनों के बीच 106 निकायों का विशाल अंतर है। इसके अलावा 8 निकायों में अन्य दलों या निर्दलीय उम्मीदवारों ने बोर्ड बनाया है। यह नतीजे राजस्थान के शहरी परिदृश्य में BJP की पकड़ को बेहद स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं।

वार्ड स्तर पर भी BJP आगे, लेकिन निर्दलीयों ने चौंकाया

वार्ड स्तर के आंकड़े भी BJP के पक्ष में झुके हैं। प्रदेश के 10,244 वार्डों में BJP ने 4,179 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस 3,613 वार्डों पर सिमट गई। हालांकि, 2,273 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे — यानी करीब एक चौथाई वार्ड किसी भी बड़े दल के हाथ नहीं आए। यह आँकड़ा दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर मतदाता अभी भी पार्टी लाइन से ऊपर उठकर व्यक्तिगत उम्मीदवारों को तरजीह देते हैं, और दोनों प्रमुख दलों के लिए यह एक ज़रूरी सबक है। BJP के लिए यह प्रदर्शन पिछले निकाय चुनावों की तुलना में 5% की बढ़त दर्शाता है, जबकि कांग्रेस के वोट शेयर में लगभग 5% की गिरावट दर्ज हुई है।

BJP के खाते में 6 नगर निगम, 31 नगर परिषदें और 162 नगर पालिकाएं आई हैं। कांग्रेस को 1 नगर निगम, 13 नगर परिषदें और 80 नगर पालिकाओं में बोर्ड मिले हैं। अजमेर और पाली में कांग्रेस वार्ड चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन निर्दलीयों के समर्थन से BJP ने बोर्ड बनाने का जादुई आँकड़ा पार कर लिया। यह दिखाता है कि post-election coalition management में BJP अभी भी कांग्रेस से कई कदम आगे है।

Congress की असली मुसीबत: हार नहीं, गुटबाजी

कांग्रेस के लिए इन नतीजों में हार से भी बड़ी चुनौती पार्टी की आंतरिक गुटबाजी रही। निकाय चुनाव के नतीजों के बाद महापौर और अध्यक्ष की कुर्सी के लिए बाड़ेबंदी, बगावत और पार्षदों की भागा-भागी का खेल चरम पर पहुँच गया। जहाँ BJP ने अनुशासित रणनीति के साथ निर्दलीयों को अपने पाले में लाने में सफलता हासिल की, वहीं कांग्रेस के भीतर नेताओं की खींचतान ने पार्टी की संभावनाओं को कई जगह खुद ही दफन कर दिया। यह स्थिति राजस्थान कांग्रेस के उस पुराने ज़ख्म को फिर से उधेड़ती है जो 2023 के विधानसभा चुनाव में भी सामने आया था।

BJP के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने इस जीत को विकास और ट्रिपल इंजन सरकार पर जनता के भरोसे का परिणाम बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मतदाताओं ने PM मोदी और CM भजनलाल शर्मा के नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए कांग्रेस के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। कोटा की जनता का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कांग्रेस की “नकली गूंज” और आंतरिक गुटबाजी पर भी जमकर निशाना साधा। जनता ने साफ संदेश दे दिया है — विकास की राजनीति, बयानबाजी पर भारी पड़ती है।

आगे की राह: BJP की नजर बाकी सीटों पर

नतीजों के बाद अब BJP और कांग्रेस दोनों के भीतर मंथन का दौर शुरू हो गया है। BJP ने 309 निकायों में से 200 में बोर्ड बनाए हैं, लेकिन पार्टी की नजर अब उन जगहों पर टिकी है जहाँ जीत की उम्मीद के बावजूद समीकरण बिगड़ गए। निकाय चुनाव हमेशा से स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार चयन, आरक्षण, गुटबाजी और निर्दलीयों के प्रभाव से तय होते रहे हैं — और राजस्थान के ये नतीजे इस सच्चाई को एक बार फिर साबित करते हैं। शहरी राजस्थान में BJP का यह दबदबा 2028 के विधानसभा चुनावों की नींव को और मजबूत करता है, और कांग्रेस को यह तय करना होगा कि वह गुटबाजी की इस बीमारी का इलाज कब और कैसे करेगी।

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