एक परिवार, दो पार्टियाँ — छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया मोड़
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला उलटफेर सामने आया है। राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री और BJP नेता गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई गुरु ढाल दास साहेब ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है — और इस एक कदम ने पूरे प्रदेश की सियासत में हड़कंप मचा दिया है।
सतनामी समाज के प्रमुख धर्मगुरु बालदास साहेब के सबसे बड़े बेटे गुरु ढाल दास का कांग्रेस में शामिल होना महज एक व्यक्ति का पार्टी बदलना नहीं है — यह एक ऐसे परिवार का विभाजन है जिसकी जड़ें छत्तीसगढ़ के सतनामी समाज में बेहद गहरी हैं। पोला तिहार के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वयं उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।
भूपेश बघेल का ट्वीट — “शुरुआत हो चुकी है”
इस मौके पर भूपेश बघेल ने खुलकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि गुरु ढाल दास के शामिल होने से कांग्रेस और मजबूत होगी और पार्टी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए आगे बढ़ेगी। बघेल ने सोशल मीडिया पर ट्वीट किया —
“शुरुआत हो चुकी है… सब मिलकर BJP को हटाएंगे।”
यह ट्वीट GenZ की भाषा में एक clear political signal है — 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है, और कांग्रेस सतनामी समाज को अपने पाले में खींचने की रणनीति पर काम कर रही है।
ढाल दास का बयान — “मैंने किसी से नहीं पूछा”
कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद गुरु ढाल दास ने साफ कहा कि “स्वतंत्र भारत में सभी आजाद हैं” और यह उनका अपना निर्णय है। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी में शामिल होने से पहले उन्होंने न अपने भाई गुरु खुशवंत से बात की और न ही पिता बालदास साहेब से। यह बयान खुद में बहुत कुछ कह देता है — परिवार में राजनीतिक मतभेद अब सार्वजनिक हो चुके हैं।
एक भाई BJP में, दूसरा कांग्रेस में — समझिए असली खेल
गुरु खुशवंत साहेब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और BJP के मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। अब उनके बड़े भाई का विपक्षी दल में जाना न केवल पारिवारिक स्तर पर बड़ी बात है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी यह एक ऐसा समीकरण बना देता है जहाँ एक ही प्रभावशाली धार्मिक-राजनीतिक परिवार दोनों बड़े दलों में एक साथ मौजूद है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह कोई साधारण घटना नहीं — यह सतनामी समाज के भीतर की उस हलचल का प्रतिबिंब है जो लंबे समय से सुलग रही थी।
सतनामी समाज का सियासी वजन — नंबर समझिए
यही कारण है कि कांग्रेस इस घटनाक्रम से उत्साहित है। अगले चुनाव में अगर सतनामी समाज का एक हिस्सा भी कांग्रेस की तरफ शिफ्ट होता है, तो उन 20 सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं।
आगे क्या? — छत्तीसगढ़ की राजनीति में गर्माहट बढ़ेगी
चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन यह सियासी उठापटक साफ संकेत देती है कि दोनों पार्टियाँ जमीनी स्तर पर अभी से मोर्चा संभाल रही हैं। BJP के लिए यह एक असहज स्थिति है — उनके खुद के कैबिनेट मंत्री के परिवार से विपक्ष को मजबूती मिल रही है। कांग्रेस के लिए यह एक symbolic और strategic जीत दोनों है।
गुरु ढाल दास का यह कदम महज एक पार्टी बदलाव नहीं — यह छत्तीसगढ़ की आने वाली राजनीतिक लड़ाई का पहला बड़ा दाँव है। अब देखना यह होगा कि BJP इसका जवाब कैसे देती है और सतनामी समाज किस दिशा में अपना रुख तय करता है।
(रिपोर्ट: सिकंदर खान, छत्तीसगढ़)

