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BRICS का बड़ा बयान: टैरिफ और संरक्षणवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा, WTO नियमों की दुहाई दी

BRICS का बड़ा बयान: टैरिफ और संरक्षणवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा, WTO नियमों की दुहाई दी

नई दिल्ली: BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने शुक्रवार को एकतरफा टैरिफ और व्यापार उपायों की कड़ी आलोचना करते हुए इन्हें WTO नियमों के खिलाफ और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा करार दिया। साथ ही, इस 11-सदस्यीय ब्लॉक ने IMF और विश्व बैंक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए अधिक प्रतिनिधित्व की मांग उठाई — यह संदेश सीधे उस वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देता है जिसे पश्चिमी देश दशकों से नियंत्रित करते आए हैं।

बढ़ती अनिश्चितता के बीच साझा मोर्चा

BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने अपने संयुक्त बयान में स्पष्ट किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजार इस वक्त “तेजी से बढ़ती अनिश्चितता और तीव्र अस्थिरता” के दौर से गुजर रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार विखंडन, संरक्षणवाद, राजकोषीय दबाव, बढ़ता कर्ज और वित्तीय कमजोरियां — इन सभी को वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण के लिए प्रमुख जोखिम के रूप में चिह्नित किया गया।

ब्लॉक ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा, “हम व्यापार और वित्त से संबंधित एकतरफा कार्रवाइयों के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जिसमें टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों को बढ़ाना शामिल है — जो व्यापार को विकृत करते हैं और WTO नियमों के असंगत हैं।” यह भाषा सीधे अमेरिकी ट्रंप प्रशासन की नीतियों की ओर इशारा करती है, भले ही नाम न लिया गया हो।

BRICS सदस्यों ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसे एकतरफा दबाव उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों पर सबसे भारी पड़ते हैं। इसके जवाब में, ब्लॉक ने WTO को केंद्र में रखते हुए एक “खुली, पारदर्शी, समावेशी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियम-आधारित” बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के लिए अपना समर्थन दोहराया।

IMF और विश्व बैंक में सुधार की मांग

BRICS समूह ने ब्रेटन वुड्स संस्थानों में सुधार की अपनी पुरानी मांग को एक बार फिर तेज आवाज में उठाया। ब्लॉक का तर्क है कि IMF और विश्व बैंक की शासन संरचनाएं आज की वैश्विक वास्तविकता को नहीं दर्शातीं — जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक GDP में तेजी से बड़ी हिस्सेदारी ले रही हैं।

वित्त मंत्रियों ने IMF में कोटा और मतदान शेयरों में तत्काल बदलाव की मांग की। इससे भी आगे जाते हुए, उन्होंने IMF प्रबंधन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात कही — एक ऐसी मांग जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से चली आ रही उस परंपरा को सीधे चुनौती देती है जिसके तहत IMF की कमान हमेशा यूरोपीय देशों के हाथ में रही है।

स्थानीय मुद्राओं पर जोर, डॉलर-निर्भरता पर सवाल

संयुक्त बयान में व्यापार और निवेश के लिए स्थानीय मुद्राओं के अधिक उपयोग का समर्थन किया गया और सीमा पार भुगतान प्रणालियों को और मजबूत करने की बात कही गई। Brazil, Russia, India, China और South Africa सहित 11 सदस्यीय यह ब्लॉक डॉलर-केंद्रित वैश्विक वित्तीय प्रणाली से धीरे-धीरे दूरी बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका ने BRICS देशों को चेतावनी दी है कि स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने की कोशिशों के कारण उन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इस दबाव के बावजूद, BRICS सदस्यों ने एकजुटता दिखाई और व्यापार युद्धों से बचने के लिए आपसी सहयोग जारी रखने का संकल्प लिया।

ट्रंप के टैरिफ की पृष्ठभूमि में आया यह बयान

यह पूरी घटनाक्रम उस समय सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 2 अप्रैल 2025 को “Liberation Day” घोषित करते हुए भारत, ब्राजील, रूस और चीन सहित दर्जनों देशों पर पारस्परिक टैरिफ का व्यापक पैकेज थोप दिया था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में इन टैरिफों को खारिज किया, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने 24 जुलाई से भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिए।

भारत के नजरिए से यह स्थिति जटिल है — एक तरफ अमेरिका के साथ रणनीतिक और व्यापारिक संबंध हैं, दूसरी तरफ BRICS मंच पर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत। लेकिन एक बात साफ है: भारत किसी एकतरफा दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। BRICS के इस संयुक्त बयान में भारत की आवाज भी उतनी ही मजबूत है जितनी किसी और सदस्य की।

वैश्विक आर्थिक विखंडन के इस दौर में BRICS का यह एकजुट संदेश — कि नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा — एक ऐसा geopolitical signal है जिसे Washington से लेकर Brussels तक नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

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