आखिर BJP कर क्या रही है उत्तराखंड में?
2027 अभी दूर लगता है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्तराखंड में तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है — और यह कोई रूटीन राजनीतिक कवायद नहीं है। पार्टी ने एक सटीक, माइक्रो-मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी तैयार की है जिसे नाम दिया जा सकता है ‘Mission 23’। 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP उत्तराखंड की 70 में से 23 सीटें हार गई थी। इन 23 सीटों में से 19 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि BSP और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो सीटें अपने नाम कीं। अब पार्टी ने इन्हीं सीटों पर अपने सबसे भरोसेमंद और वजनदार नेताओं को तैनात किया है — ताकि 2027 तक जमीन पूरी तरह तैयार हो सके।
यह सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं है। यह BJP का एक organizational signal है — कि पार्टी हर बूथ, हर गली, हर वोटर तक पहुंचना चाहती है। Anti-incumbency को वक्त रहते काटना है, GenZ voters की नाराजगी दूर करनी है, और 2022 की गलतियों को 2027 में दोहराना नहीं है।
CM धामी को खटीमा क्यों? क्या वे वहाँ से लड़ेंगे?
यह सवाल सबसे दिलचस्प है। 2022 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी पारंपरिक सीट खटीमा से हार गए थे। यह किसी के लिए भी चौंकाने वाला था — एक बैठे CM का अपनी ही सीट से हारना। बाद में वे चंपावत से उपचुनाव जीतकर CM की कुर्सी पर बने रहे। अब पार्टी ने उन्हें खटीमा की जिम्मेदारी सौंपी है — ताकि वे वहां लगातार जाएं, लोगों से मिलें, बूथ लेवल पर पार्टी को मजबूत करें और राजनीतिक समीकरण को अपने पक्ष में करें।
BJP के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट कहा कि धामी का खटीमा से गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव है। वे वहां के लोगों को जानते हैं, कार्यकर्ताओं की नब्ज पकड़ते हैं। लेकिन असली सवाल यह है — क्या वे 2027 में खटीमा से ही चुनाव लड़ेंगे? BJP का केंद्रीय नेतृत्व यह फैसला चुनाव के करीब लेगा। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, चंपावत से लड़ना ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है — जहां धामी पहले ही जीत का स्वाद चख चुके हैं।
23 सीटों पर कौन-कौन से दिग्गज उतरे हैं?
BJP ने इस मिशन के लिए अपनी पूरी फर्स्ट इलेवन उतार दी है। हर हारी हुई सीट पर एक वजनदार चेहरा। यह लिस्ट देखिए और समझिए कि पार्टी इस बार कितनी गंभीर है:
यह माइक्रो-मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी काम करेगी?
BJP की यह रणनीति दरअसल उस पुराने RSS-style ground-up organizing से प्रेरित है जो पार्टी की असली ताकत रही है। हर नेता को एक specific constituency assign करना, उन्हें वहां बार-बार जाने के लिए बाध्य करना, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर strategy बनाना — यह सब एक long-game है। 2027 से पहले दो साल का वक्त है, और BJP इसे बर्बाद नहीं करना चाहती।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि इन नेताओं की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव प्रचार नहीं है — वे राजनीतिक हालात का आकलन करेंगे, anti-incumbency के कारण समझेंगे, और जमीन पर BJP के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करेंगे। चकराता और धारचूला जैसी सीटें — जहां BJP कभी नहीं जीती — वहां भी पार्टी अब हार मानने को तैयार नहीं है। यह aggressive expansion है।
उत्तराखंड की राजनीति में 2027 का चुनाव महज सत्ता का खेल नहीं होगा — यह BJP के organizational machine का असली इम्तिहान होगा। Mission 23 की सफलता यह तय करेगी कि पार्टी सिर्फ सरकार बनाती है, या उत्तराखंड की हर सीट पर अपना झंडा गाड़ती है।

